बरसठी जौनपुर : आदमपुर में आंगनवाड़ी निर्माण घोटाला: 6 इंच की जगह 2 इंच की ढलाई, सिस्टम पर बड़ा सवाल।
और आप देख रहे हैं न्याय की बात।
आज की यह रिपोर्ट आदमपुर गांव से है। एक ऐसा गांव, जहाँ कागज़ों में तो विकास हो चुका है, लेकिन ज़मीन पर विकास की दीवारें खुद सच्चाई की तरह फट चुकी हैं। आंगनवाड़ी केंद्र, जो बच्चों के भविष्य की नींव होता है, वही आज भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा नज़र आ रहा है।
यह सिर्फ ईंट, बालू और सीमेंट की कहानी नहीं है… यह सिस्टम के उस चेहरे की कहानी है, जहाँ मानक सिर्फ फाइलों में ज़िंदा हैं और ज़मीन पर दम तोड़ देते हैं।
1. निर्माण कार्य पर सवाल: मानक बनाम हकीकत
सरकारी मानक साफ़ कहता है – PCC की ढलाई कम से कम 6 इंच होनी चाहिए।
लेकिन आदमपुर में जब ग्रामीणों ने खुद नापी की, तो सच्चाई चौंकाने वाली थी। कहीं 2 इंच, कहीं 3 इंच… और कहीं-कहीं तो ढलाई नाम मात्र की।
यह कोई तकनीकी गलती नहीं है। यह सीधा-सीधा सरकारी धन की चोरी है।
जब हमने मौके पर जाकर देखा, तो कई जगह से PCC खुद हाथ से उखड़ रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी हाल यह है, तो बरसात में यह इमारत क्या टिक पाएगी?
2. घटिया सामग्री का खुला इस्तेमाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि:
बालू में मिट्टी मिली हुई है
सीमेंट की मात्रा बेहद कम रखी गई
गिट्टी मानक के अनुरूप नहीं
ढलाई बिना सही लेवल और कम्पैक्शन के की गई
यह वही आंगनवाड़ी है जहाँ छोटे-छोटे बच्चे बैठेंगे, पढ़ेंगे, पोषण पाएँगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार ने बच्चों के लिए मजबूत इमारत दी है या ठेकेदारों के लिए कमाई का ज़रिया?
3. ग्रामीणों में आक्रोश, सवालों की बाढ़
जब गांव के लोगों ने यह अनियमता देखी, तो गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि:
“अगर हम अपने घर में 2 इंच की ढलाई कराएं तो क्या मकान खड़ा रहेगा? फिर सरकार के भवन में यह कैसे चल सकता है?”
ग्रामीणों ने अधिकारियों से जांच की मांग की। गांव में साफ़-साफ़ कहा गया – या तो सही निर्माण होगा, या आंदोलन।
4. मौके पर मौजूद लोग
इस विरोध के दौरान गांव के कई लोग मौजूद रहे:
आनंद यादव (ठेकेदार)
प्रदीप यादव
साहब लाल यादव उर्फ भोला
कृष्ण कुमार यादव
हरीश चंद्र यादव उर्फ बुलंदर
संजय यादव
होरी लाल यादव
सुनजन यादव
और बड़ी संख्या में ग्रामीण
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान एवं ठेकेदार पर घटिया सामग्री उपयोग करने का सीधा आरोप लगाया। हालांकि ग्राम पंचायत व ठेकेदार की ओर से अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया है।
5. सवाल सिस्टम से
यह सवाल सिर्फ ठेकेदार से नहीं है।
सवाल यह है कि:
क्या इंजीनियर ने जांच की?
क्या जेई ने माप पुस्तिका सही भरी?
क्या भुगतान बिना जांच के कर दिया गया?
अगर 2 इंच की ढलाई को 6 इंच दिखाकर भुगतान हुआ है, तो जिम्मेदार कौन है?
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं है… यह सरकारी आंखों में धूल झोंकने का मामला है।
6. कागज़ों का विकास और ज़मीन की सच्चाई
सरकारी रिपोर्ट में शायद यह आंगनवाड़ी:
पूर्ण दिखा दी गई हो
गुणवत्ता उत्तम लिखी गई हो
भुगतान भी हो चुका हो
लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है।
यह वही विकास है जो फोटो में चमकता है, लेकिन बारिश में बह जाता है।
7. ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों की तीन साफ़ मांगें हैं:
1. निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच हो
2. दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई हो
3. दोबारा मानक के अनुसार निर्माण कराया जाए
लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने आंख बंद रखी, तो वे जिला स्तर पर आंदोलन करेंगे।
8. अंत में सवाल
आज आदमपुर में आंगनवाड़ी की दीवारें भले खड़ी हों… लेकिन भरोसे की दीवार टूट चुकी है।
सरकार की योजना अच्छी है। लेकिन योजना ज़मीन पर पहुंचते-पहुंचते खोखली हो जाती है।
और जब बच्चों के भवन में ही भ्रष्टाचार हो, तो सोचिए… देश का भविष्य किस ढलाई पर खड़ा है?
यह था न्याय की बात से आदमपुर की विशेष रिपोर्ट।
सवाल पूछते रहिए… क्योंकि सवाल ही लोकतंत्र की नींव होते हैं।
न्याय की बात आपके साथ है।
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