भदोही में विश्वकर्मा महोत्सव: समाज को संगठित कर जागरूकता का संदेश।
भदोही।
जनपद भदोही में आयोजित विश्वकर्मा महोत्सव में विश्वकर्मा समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर सामाजिक एकता और जागरूकता का परिचय दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को एक मंच पर लाकर उसके इतिहास, योगदान और वर्तमान स्थिति पर सार्थक चर्चा करना रहा।
महोत्सव के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विश्वकर्मा समाज ने सदियों से निर्माण, शिल्प, तकनीक और सृजन के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन इसके बावजूद समाज को लंबे समय तक दबाने और उसके योगदान को नजरअंदाज करने का प्रयास किया गया।
इतिहास से अनभिज्ञ होती नई पीढ़ी पर चिंता
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष चिंता जताई गई कि आज की नई पीढ़ी को यह तक सही रूप में नहीं बताया जा रहा कि विश्वकर्मा कौन थे और उनका योगदान क्या था। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता, प्रथम शिल्पकार और निर्माण कला के जनक के रूप में माना जाता है।
वक्ताओं का कहना था कि
आज जिन भवनों, औजारों, यंत्रों और तकनीकों पर आधुनिक सभ्यता आधारित है, उनकी जड़ें विश्वकर्मा परंपरा से जुड़ी हुई हैं, लेकिन समाज को अपने ही इतिहास से दूर कर दिया गया है।
योगदान लिया गया, सम्मान नहीं”
मंच से यह भी कहा गया कि
विश्वकर्मा समाज के श्रम और कौशल का उपयोग तो हर युग में किया गया, लेकिन समाज को उसका उचित सामाजिक और राजनीतिक सम्मान नहीं मिला। यह स्थिति तब तक बनी रही, जब तक समाज संगठित नहीं हुआ।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि
अब समय आ गया है कि विश्वकर्मा समाज अपने अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी को लेकर सजग बने।
शिक्षा और संगठन पर दिया गया बल
महोत्सव में समाज के लोगों से अपील की गई कि
शिक्षा को प्राथमिकता दें।
तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण को अपनाएं
आपसी एकता बनाए रखें
सामाजिक व राजनीतिक रूप से जागरूक बनें
कार्यक्रम में युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया गया कि वे अपने इतिहास और संस्कृति को समझें तथा आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ें।
महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें विश्वकर्मा परंपरा, श्रम और शिल्प को दर्शाया गया। कार्यक्रम के अंत में समाज की उन्नति और एकता के लिए संकल्प लिया गया।
भदोही में आयोजित विश्वकर्मा महोत्सव
सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि
समाज को संगठित करने, इतिहास से जोड़ने और भविष्य के लिए जागरूक करने का प्रयास साबित हुआ।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि
विश्वकर्मा समाज अपने योगदान को पहचानते हुए
अब शिक्षा, संगठन और आत्मसम्मान के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
न्याय की बात।
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बना सकता हूँ।













