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जहाँ जनप्रतिनिधि बने रहे मौन, वहाँ समाजसेवियों ने थामा इंसानियत का हाथ — गरीबों को मिला कंबल का सहारा।

जहाँ जनप्रतिनिधि बने रहे मौन, वहाँ समाजसेवियों ने थामा इंसानियत का हाथ — गरीबों को मिला कंबल का सहारा।

जौनपुर जिले में इस समय कड़ाके की ठंड अपने चरम पर है। घने कोहरे, शीतलहर और गिरते तापमान ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, लेकिन सबसे अधिक इसका दुष्प्रभाव गरीब, असहाय और पीड़ित वर्ग पर पड़ रहा है। जिनके पास न पक्के घर हैं, न गर्म कपड़े और न ही ठंड से बचने के लिए कोई ठोस साधन, उनके लिए यह ठंड किसी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं है। ऐसे हालात में सरकार, ग्राम प्रधान, सांसद, विधायक जैसे जनप्रतिनिधियों से उम्मीद होती है कि वे आगे आएँ, राहत सामग्री, कंबल, अलाव और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करें, लेकिन जौनपुर जिला अंतर्गत कछोटा बनकट कांटी ग्राम सभा में स्थिति बिल्कुल उलट देखने को मिली।

ग्राम सभा में ठंड से बचाव के लिए अब तक न तो ग्राम प्रधान की ओर से कोई पहल की गई और न ही सांसद-विधायक द्वारा गरीब पीड़ित परिवारों तक राहत पहुँचाने की कोई व्यवस्था नजर आई। सरकारी योजनाएँ कागजों में भले ही सक्रिय हों, लेकिन धरातल पर जरूरतमंद लोगों तक मदद न पहुँचने की तस्वीर स्पष्ट दिखाई दे रही थी। इस बीच, गाँव के समाजसेवी रामलाल पाल और भजन पाल गरीबों के मसीहा बनकर सामने आए। उन्होंने बिना किसी सरकारी सहयोग या राजनीतिक मंच का इंतजार किए, अपने निजी संसाधनों और मेहनत से जरूरतमंद, असहाय और पीड़ित लोगों के बीच जाकर ठंड में कंबल वितरण का कार्य किया।

यह वितरण कार्यक्रम पूरी तरह मानवीय भावना से प्रेरित था। ठंड में कंपकंपाते लोगों के चेहरे पर राहत की मुस्कान उस समय दिखाई दी, जब रामलाल पाल और भजन पाल ने अपने हाथों से उन्हें कंबल ओढ़ाए। यह दृश्य बता रहा था कि इंसानियत का असली मतलब सत्ता के गलियारों में नहीं, बल्कि समाजसेवा के मैदान में मिलता है। कंबल वितरण के दौरान गाँव के कई प्रतिष्ठित और जागरूक समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस नेक कार्य में अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को और भी मजबूत बनाया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे अवधेश सिंह, महेन्द्र सिंह, हौसिला प्रसाद शुक्ला, नीरज शुक्ला, भुआल चौहान, सन्तोष गौड़, भुआल चौहान, संतोष गौड़, सहित गाँव के समस्त समाजसेवी। सभी ने इस पहल की सराहना की और कहा कि जब तक समाज में ऐसे रामलाल पाल और भजन पाल जैसे लोग मौजूद हैं, तब तक गरीबों की उम्मीद और इंसानियत जिंदा रहेगी।

इस कार्यक्रम में किसी भी तरह का राजनीतिक प्रचार-प्रसार नहीं था, न कोई भाषणबाजी और न ही कैमरे की चमक-धमक के लिए मदद। यह मदद केवल गरीबों की जरूरत और समाजसेवियों के संकल्प के लिए थी। गाँव के लोगों ने कहा कि आज के दौर में जहाँ जनप्रतिनिधि केवल चुनावी समय में दिखाई देते हैं, वहीं समाजसेवी हर दुख-दर्द में गरीबों के साथ खड़े नजर आते हैं।

कंबल पाकर गरीबों ने समाजसेवियों को आशीर्वाद दिया और कहा कि आज वे ही उनके सच्चे हमदर्द हैं। यह घटना साबित करती है कि समाजसेवा किसी पद, सत्ता या सरकारी मोहर की मोहताज नहीं होती। असली नेतृत्व वही है, जो जरूरत के समय बिना बुलाए मदद के लिए पहुँच जाए। कछोटा बनकट कांटी ग्राम सभा का यह कंबल वितरण कार्यक्रम जौनपुर जिले के लिए मानवता, सहयोग और समाजसेवा की एक प्रेरणादायी मिसाल बन चुका है।

न्याय की बात।

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