चौरा माता मंदिर विवाद: इस्तीफे और लोगो (Logo) के फेर में फंसा मंदिर प्रबंधन, नए अध्यक्ष संजय शुक्ला से उठे गंभीर सवाल।
विशेष रिपोर्ट
चौरा माता धाम। प्रसिद्ध और आस्था के केंद्र चौरा माता मंदिर का प्रबंधन इस समय भारी विवादों और कशमकश के दौर से गुजर रहा है। मंदिर की नई और पुरानी कमेटी के बीच पारदर्शिता को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस पूरे विवाद के केंद्र में दो बड़े सवाल खड़े हुए हैं, जिन्होंने नए अध्यक्ष संजय शुक्ला और प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पहला बड़ा सवाल: सुभाष पांडेय का ‘रहस्यमयी’ इस्तीफा और फंड का हिसाब कहाँ है?
मंदिर प्रबंधन का सबसे बड़ा विवाद पूर्व अध्यक्ष सुभाष पांडेय जी के इस्तीफे और मंदिर के फंड से जुड़ा हुआ है।
गुमशुदा इस्तीफा पत्र: स्थानीय लोगों और जागरूक भक्तों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सुभाष पांडेय जी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, तो वह इस्तीफा पत्र (Resignation Letter) कहाँ है? नए अध्यक्ष और वर्तमान कमेटी उस पत्र को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है?
फंड की वापसी का मुद्दा: आरोपों के मुताबिक, इस्तीफा देने के बाद भी पूर्व अध्यक्ष सुभाष पांडेय ने अभी तक मंदिर का फंड वापस नहीं किया है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर इस्तीफा हो चुका है, तो वित्तीय प्रभार (Financial Charge) नए अध्यक्ष को क्यों नहीं सौंपा गया? वित्तीय पारदर्शिता के अभाव में मंदिर के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।
मांग: नए अध्यक्ष अविलंब सुभाष पांडेय जी का इस्तीफा पत्र सार्वजनिक करें और फंड की स्थिति साफ करें।
दूसरा बड़ा सवाल: बदला हुआ ‘लोगो’ (Logo)—क्या संस्थाएं ही अलग हैं?
इस पूरे विवाद में एक नया और बेहद गंभीर मोड़ तब आया जब लोगों ने ध्यान दिया कि पुराने चौरा माता मंदिर का लोगो (Logo) कुछ और था, जबकि नई कमेटी के तहत जारी किया गया लोगो पूरी तरह अलग है।
इस बदलाव ने भक्तों और दानदाताओं के बीच भारी भ्रम पैदा कर दिया है। लोग सीधे तौर पर नए अध्यक्ष संजय शुक्ला से यह स्पष्टीकरण मांग रहे हैं:
एक ही संस्था या नया खेल? क्या नया लोगो सिर्फ एक कॉस्मेटिक बदलाव है, या फिर इसके पीछे किसी नई संस्था (Organization) का गठन किया गया है?
पुरानी संपत्ति का क्या होगा? अगर यह संस्था अलग है, तो पुराने मंदिर के नाम पर आया दान और संपत्ति किस आधार पर इस्तेमाल की जा रही है?
जनता की मांग: संजय शुक्ला जी, चुप्पी तोड़िए!
चौरा माता मंदिर सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि रनापुर हजारों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में नए अध्यक्ष संजय शुक्ला जी को सामने आकर इन दोनों मुख्य बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी:
आश्वासन: क्या दोनों आर्गेनाइजेशन एक ही हैं या अलग-अलग?
पारदर्शिता: सुभाष पांडेय का इस्तीफा कब और किन शर्तों पर स्वीकार हुआ?
ऑडिट: मंदिर के फंड का पूरा लेखा-जोखा जनता के सामने कब रखा जाएगा?
जब तक वर्तमान कमेटी इन सवालों के लिखित और आधिकारिक जवाब नहीं देती, तब तक चौरा माता मंदिर के प्रबंधन पर उठ रहे ये सवालिया निशान हटने वाले नहीं हैं। भक्त अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होने वाले, उन्हें ठोस सबूत चाहिए।













