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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद श्री बजरंग सेना ने केंद्र के 3 मंत्रालयों को भेजा विधिक प्रतिवेदन।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद श्री बजरंग सेना ने केंद्र के 3 मंत्रालयों को भेजा विधिक प्रतिवेदन।

– गौ-संरक्षण और नए कानूनों में संशोधन की मांग 

 

सूरत। श्री बजरंग सेना की ओर से केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को एक विस्तृत विधिक प्रतिवेदन भेजकर गौ माता को “राष्ट्र माता” का संवैधानिक दर्जा देने, देशभर के बूचड़खानों को बंद करने तथा नए आपराधिक कानूनों में संशोधन की मांग उठाई गई है। यह प्रतिवेदन गृह मंत्रालय, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय को संबोधित किया गया है।

 

प्रतिवेदन में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 मार्च 2026 को पारित आदेश में याचिकाकर्ता श्री बजरंग सेना को संबंधित मंत्रालयों के समक्ष अपनी मांगें और शिकायतें रखने की स्वतंत्रता प्रदान की थी।

 

संगठन का कहना है कि नई भारतीय न्याय संहिता में पूर्व की भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को समाप्त किए जाने के कारण पशुओं के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म से जुड़े मामलों में कठोर दंड का स्पष्ट प्रावधान नहीं रह गया है। प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि इस विधिक कमी का लाभ उठाकर आरोपी आसानी से बच निकलते हैं।

 

प्रतिवेदन में मांग की गई है कि भारतीय न्याय संहिता में संशोधन कर पशुओं के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म को फिर से गंभीर, गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध घोषित किया जाए तथा इसमें कम से कम 10 वर्ष के कठोर कारावास का प्रावधान रखा जाए।

 

इसके अलावा संगठन ने देशभर में संचालित वैध और अवैध बूचड़खानों पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने, अंतर्राज्यीय अवैध गौ-तस्करी रोकने के लिए केंद्रीय टास्क फोर्स बनाने और प्रत्येक जिले में आधुनिक गौशालाओं की स्थापना की मांग भी उठाई है।

 

प्रतिवेदन में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष हितेश विश्वकर्मा ने कहा कि करोड़ों लोगों की धार्मिक और मानवीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को इस विषय पर ठोस विधायी कदम उठाने चाहिए। साथ ही आगामी संसद सत्र में गौ-संरक्षण और पशुओं के विरुद्ध अपराधों पर सख्त कानून लाने की मांग भी की गई है।

 

गौरतलब है कि गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने और नए पारित कानून में संशोधन करने की मांग के साथ श्री बजरंग सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हितेश विश्वकर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर की थी। इस याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता सम्बंधित मंत्रालयों को प्रतिवेदन करने के लिए स्वतंत्र है। इसके बाद सोमवार को श्री बजरंग सेना की ओर से सम्बंधित मंत्रालयों को विधिक प्रतिवेदन भेजा गया है।

जौनपुर से जिला ब्यूरो अमन विश्वकर्मा की रिपोर्ट ।

Nyaykibaat.com

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