नशे के खिलाफ जागरूकता पर इंटरव्यू के लिए पहुंचे, बोले अधिकारी—“मैं अथराइज्ड नहीं हूं”, उठे कई सवाल।
गढ़वा। शराब और नशे के बढ़ते प्रभाव से आम लोगों और गरीब परिवारों को होने वाले नुकसान को लेकर जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से न्याय की बात की ओर से एक जिम्मेदार अधिकारी से इंटरव्यू के लिए संपर्क किया गया था।
इंटरव्यू के लिए समय तय होने के बाद टीम निर्धारित समय पर पहुंची और संबंधित अधिकारी से संपर्क किया गया। बातचीत की शुरुआत में इंटरव्यू को लेकर सहमति दिखाई गई, लेकिन बाद में अधिकारी ने कहा कि वह इंटरव्यू देने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
अधिकारी के अनुसार, उनके ऊपर वरिष्ठ अधिकारियों का अधिकार है और यदि उन्होंने बिना अनुमति किसी विषय पर बयान दिया तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
नशे से जुड़े गंभीर सवालों पर बातचीत का था उद्देश्य
दरअसल, इंटरव्यू का उद्देश्य किसी गोपनीय या विभागीय जानकारी को सामने लाना नहीं था। सवाल मुख्य रूप से शराब और नशे के खिलाफ जागरूकता से जुड़े थे।
इस दौरान यह जानने का प्रयास किया जाना था कि नशे की वजह से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए लोगों को किस तरह जागरूक किया जा सकता है, नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होती है और नशे की वजह से प्रभावित परिवारों के लिए प्रशासन या पुलिस की ओर से किस प्रकार की जागरूकता गतिविधियां की जाती हैं।
गरीब और पीड़ित परिवारों की आवाज कौन सुनेगा?
ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे गरीब और पीड़ित परिवार भी हैं, जो किसी घटना या परेशानी के बाद पुलिस-प्रशासन के सामने अपनी बात रखने में झिझकते हैं।
ऐसे में सवाल यह भी है कि इन परिवारों तक सही जानकारी और जागरूकता कैसे पहुंचेगी?
अगर जनता से जुड़े सामान्य सवालों पर भी अधिकारी बिना वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के सार्वजनिक रूप से बात नहीं कर सकते, तो आम लोगों तक आधिकारिक जानकारी पहुंचाने के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए?
सवाल किसी अधिकारी से नहीं, व्यवस्था से है
यह पूरा मामला किसी एक अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं है। संबंधित अधिकारी ने अपनी ओर से अधिकार और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति का हवाला दिया है।
लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है—
जब सवाल जनता की सुरक्षा, नशे से बर्बाद हो रहे परिवारों और लोगों को जागरूक करने का हो, तो इन सवालों का आधिकारिक जवाब जनता तक कैसे पहुंचेगा?
नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है। इसका सीधा असर परिवार, सड़क सुरक्षा और समाज पर पड़ता है।
इसलिए जरूरत है कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए और लोगों को यह जानकारी दी जाए कि परेशानी की स्थिति में वे अपनी शिकायत और समस्या लेकर संबंधित विभाग तक किस तरह पहुंच सकते हैं।
न्याय की बात का उद्देश्य किसी व्यक्ति को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े सवालों को सामने लाना और संबंधित पक्ष का जवाब जनता तक पहुंचाना है।
रिपोर्ट: न्याय की बात।












