गांवों की समस्या सुनने खुद पहुंच रहे BDO सह CO, ग्रामीणों ने की प्रवीण कुमार सिंह की कार्यशैली की सराहना।
गढ़वा। जिले के बरडीहा प्रखंड में BDO सह CO प्रवीण कुमार सिंह की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी सुबह होते ही अपनी टीम के साथ क्षेत्र के गांवों का भ्रमण करते हैं और मौके पर पहुंचकर लोगों की समस्याओं को सुनने का प्रयास करते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांवों में सड़क, पेयजल और जमीन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी मिलने पर अधिकारी संबंधित कर्मियों के साथ मौके पर ही स्थिति का जायजा लेते हैं और नियमानुसार समाधान की दिशा में कार्रवाई करने का प्रयास करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी के गांवों तक पहुंचने से लोगों को अपनी समस्याएं कार्यालय तक ले जाने की परेशानी कम होती है। यही वजह है कि बरडीहा प्रखंड क्षेत्र के कई ग्रामीण उनकी कार्यशैली की सराहना कर रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है—क्या इसी तरह की सक्रिय कार्यशैली जिले के दूसरे प्रखंडों में भी देखने को मिलनी चाहिए?
अगर एक अधिकारी गांवों तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन सकता है और मौके पर संबंधित विभाग के साथ कार्रवाई की शुरुआत कर सकता है, तो क्या दूसरे प्रखंडों में भी ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए?
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों का नियमित रूप से गांवों में जाना और आम लोगों से सीधे संवाद करना शासन-प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम करने का बेहतर माध्यम हो सकता है।
वहीं, यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि हर समस्या का समाधान मौके पर तत्काल संभव नहीं होता। कई मामलों में विभागीय प्रक्रिया, जांच और उच्चाधिकारियों की स्वीकृति की आवश्यकता होती है। इसलिए किसी भी अधिकारी की कार्यशैली का मूल्यांकन उसके द्वारा की गई वास्तविक कार्रवाई और उसके परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए।
बरडीहा के ग्रामीणों की उम्मीद साफ है—अगर जिले के हर प्रखंड में अधिकारी इसी तरह नियमित रूप से गांवों का भ्रमण करें, लोगों की समस्याएं सुनें और संबंधित मामलों में तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हो सकता है।
न्याय की बात का सवाल:
क्या बरडीहा प्रखंड की यह कार्यशैली दूसरे प्रखंडों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है? और क्या जिले के सभी प्रखंडों में अधिकारियों का नियमित ग्रामीण भ्रमण सुनिश्चित किया जाना चाहिए?
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