Search
Close this search box.

गरीबों की आवाज उठाने वाला पत्रकार खुद पूछ रहा सवाल: अधिकारियों तक आम जनता की फरियाद क्यों नहीं पहुँच रही?

गरीबों की आवाज उठाने वाला पत्रकार खुद पूछ रहा सवाल: अधिकारियों तक आम जनता की फरियाद क्यों नहीं पहुँच रही?

धुरकी, गढ़वा (झारखंड): गरीबों और जरूरतमंदों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाने का दावा करने वाले समाचार मंच ‘न्याय की बात’ ने अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। मंच की ओर से आरोप लगाया गया है कि कई बार फोन से संपर्क करने और आवेदन देने के बावजूद संबंधित समस्याओं पर स्पष्ट जवाब या कार्रवाई की जानकारी नहीं मिलती। ऐसे में सवाल उठता है कि आम जनता अपनी शिकायतों के समाधान के लिए आखिर किसका दरवाजा खटखटाए?

BDO, CO, SDM और DM से जवाबदेही का सवाल

‘न्याय की बात’ की ओर से धुरकी प्रखंड के बीडीओ बिमल कुमार सिंह, संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ), अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) और जिला प्रशासन से सवाल किया गया है कि जब किसी नागरिक की समस्या को लेकर संपर्क किया जाता है, तो उसे जवाब और आगे की प्रक्रिया की जानकारी कैसे मिलेगी?

पत्रकार का कहना है कि अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। वहीं, कुछ आवेदनों पर एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जवाब या कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है। हालांकि, संबंधित आवेदनों की स्थिति और प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

सात से आठ वर्षों से जनता की आवाज उठाने का दावा

‘न्याय की बात’ से जुड़े पत्रकार का कहना है कि वह पिछले सात से आठ वर्षों से गरीबों, पीड़ितों और जरूरतमंदों की समस्याओं को सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य लोगों की शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाना और जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करना है।

पत्रकार का सवाल है कि जब दूसरों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाला व्यक्ति खुद अपनी शिकायत या आवेदन की स्थिति जानने के लिए परेशान हो, तो उन गरीब लोगों की स्थिति क्या होगी जिनके पास न आर्थिक संसाधन हैं और न ही बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की क्षमता?

आवेदन पर जवाब और कार्रवाई की जानकारी देने की मांग

पत्रकार ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित आवेदनों की स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि किसी आवेदन में दस्तावेजों की कमी है, तो आवेदक को इसकी जानकारी दी जाए। यदि जांच आवश्यक है, तो नियमानुसार जांच की जाए। और यदि मामला किसी दूसरे विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो आवेदक को उचित मार्गदर्शन दिया जाए।

साथ ही, प्रशासनिक अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की गई है कि व्यस्तता के कारण फोन नहीं उठ पाने की स्थिति में संभव होने पर बाद में संपर्क किया जाए या संबंधित कार्यालय के माध्यम से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

जनता की शिकायतों पर जवाबदेही जरूरी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालय में बैठकर काम करना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं पर नियमानुसार सुनवाई और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। हर शिकायत पर आवेदक के पक्ष में निर्णय होना आवश्यक नहीं है, लेकिन उसे निष्पक्ष सुनवाई और अपनी शिकायत की स्थिति जानने का अवसर मिलना चाहिए।

‘न्याय की बात’ ने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे सामने आकर अपना पक्ष रखें और लंबित आवेदनों पर हुई कार्रवाई की जानकारी दें।

अब सवाल यह है कि संबंधित आवेदनों पर क्या कार्रवाई हुई है और प्रशासन इस मामले में क्या जवाब देता है? इस संबंध में अधिकारियों का पक्ष मिलने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

न्याय की बात — न्याय की आवाज, जनता के साथ।

Leave a Comment

और पढ़ें

best news portal development company in india

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें