जमीन विवाद में पत्रकार ने प्रशासन से मांगा न्याय, थाना से DC कार्यालय तक आवेदन के बाद भी कार्रवाई का इंतजार।
खतियान, रैयती जमीन के दस्तावेज और ऑनलाइन लगान रसीद होने का दावा; मारपीट और जमीन से हटाने के प्रयास का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
गढ़वा: जमीन विवाद को लेकर एक पत्रकार ने थाना, अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। पत्रकार का कहना है कि विवादित जमीन से संबंधित उसके पास खतियान, रैयती जमीन के कागजात और ऑनलाइन लगान की रसीद उपलब्ध है। मामले को लेकर थाना से लेकर अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन तक कई बार आवेदन दिए जाने का दावा किया गया है।
पत्रकार के अनुसार, विवादित जमीन को लेकर विपक्षी पक्ष द्वारा जमीन से हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी विवाद के दौरान मारपीट की घटना होने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कई बार थाना में दिया आवेदन
पत्रकार का कहना है कि जमीन विवाद को लेकर कई बार थाना में आवेदन दिया गया। इसके अलावा अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन को भी लिखित शिकायत दी गई। मामले को लेकर डीसी महोदय को भी आवेदन सौंपे जाने की बात कही गई है।
पत्रकार के मुताबिक, पूर्व में विवाद को लेकर समझौते की स्थिति भी बनी थी और लिखित समझौते में जमीन छोड़ने की बात दर्ज होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
सवाल—आखिर कार्रवाई कब होगी?
पत्रकार का कहना है कि वह प्रशासन से अपने पक्ष में कोई फैसला नहीं मांग रहा है। उसकी मांग केवल इतनी है कि दोनों पक्षों के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच हो, मौके की स्थिति देखी जाए और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का दावा सही है तो उसे उसका अधिकार मिलना चाहिए और यदि किसी पक्ष का दावा गलत है तो जांच के बाद कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
“जब पत्रकार की आवाज नहीं सुनी जा रही तो आम आदमी का क्या होगा?”
पत्रकार ने इस पूरे मामले को आम आदमी के न्याय से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया है।
उनका कहना है कि यदि एक पत्रकार को अपनी शिकायत लेकर थाना, अंचल और जिला कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो उस गरीब और कमजोर व्यक्ति की स्थिति क्या होगी, जिसके पास अपनी बात रखने के लिए न पर्याप्त संसाधन हैं और न ही कोई मंच?
उन्होंने कहा कि उनकी टीम लगातार आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को खबर के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाने का काम करती है। लेकिन आज उन्हें खुद अपनी समस्या को लेकर अधिकारियों के दरवाजे पर जाना पड़ रहा है।
आगे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से कार्रवाई की बात
पत्रकार के अनुसार, अपने आवेदन में उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती है तो वे कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे आवेदन देंगे और आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी के खिलाफ संघर्ष करना नहीं, बल्कि मामले की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग करना है।
प्रशासन से क्या है मांग?
पत्रकार ने प्रशासन से मुख्य रूप से चार मांगें रखी हैं—
– दोनों पक्षों के जमीन संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाए।
– विवादित जमीन की मौके पर जांच की जाए।
– मारपीट और धमकी से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए।
– जांच के आधार पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
पत्रकार का कहना है कि उन्हें प्रशासन से किसी एक पक्ष के पक्ष में फैसला नहीं चाहिए। वह केवल निष्पक्ष जांच और कानून सम्मत कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
“न्याय सिर्फ मिलना नहीं चाहिए, न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए”
इस पूरे मामले में अब नजर जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर है। शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को संज्ञान में लेकर दोनों पक्षों की बात और दस्तावेजों की जांच करेगा तथा नियमानुसार उचित कदम उठाएगा।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक जमीन का नहीं है। सवाल उस भरोसे का भी है, जो आम नागरिक कानून और प्रशासन पर करता है।
न्याय की बात — जनता के साथ।












