पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी मनोज कुमार सिंह ने उठाए पंचायत विकास पर सवाल, बोले—“गांव में धरातल पर विकास शून्य।
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गढ़वा। पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी मनोज कुमार सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था का उद्देश्य गांव के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, लेकिन कई जगहों पर जरूरतमंद ग्रामीण आज भी अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं।
मनोज कुमार सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से ग्राम पंचायतों तक विकास योजनाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, ताकि गरीब, पीड़ित, बुजुर्ग, दिव्यांग और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर हो सके। लेकिन उनके अनुसार, योजनाओं की जानकारी और क्रियान्वयन में कमी के कारण कई जरूरतमंद लोगों को आज भी अपने काम के लिए प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जो बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति ठीक से चल भी नहीं सकता, उसे भी सरकारी काम के लिए बार-बार ब्लॉक का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसी स्थिति पंचायती राज व्यवस्था के उद्देश्य पर सवाल खड़े करती है।
पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी ने गांवों की मूलभूत सुविधाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस गली में ग्रामीणों का आवागमन होता है, वहां बेहतर सड़क होनी चाहिए। गांव में रोशनी के लिए पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और जरूरतमंद परिवारों के लिए आवास की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।
उनका आरोप है कि कई ग्रामीण आज भी पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने, खराब सड़कों से परेशानी झेलने और आवास के लिए सरकारी सहायता का इंतजार करने को मजबूर हैं।
मनोज कुमार सिंह ने पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यक्षमता और शिक्षा के मुद्दे को भी उठाया। उनका कहना है कि यदि पंचायत स्तर पर योजनाओं की बेहतर जानकारी रखने वाले और जिम्मेदारी समझने वाले जनप्रतिनिधि हों, तो सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक बेहतर तरीके से पहुंच सकता है।
हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक/सामाजिक आकलन है और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष इस विषय पर अलग हो सकता है। विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित पंचायत, प्रखंड प्रशासन और ग्रामीणों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
मनोज कुमार सिंह ने कहा कि विकास केवल सरकारी कागजों या योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर गांव की गलियों, सड़कों, पानी, बिजली और गरीब परिवारों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की कि गांवों में जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का सर्वे कराकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
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