गढ़वा जिला के धुरकी थाना क्षेत्र अंतर्गत टाटीदीरी ग्राम पंचायत में आज वट पूजा बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई।
गढ़वा जिला के धुरकी थाना क्षेत्र अंतर्गत टाटीदीरी ग्राम पंचायत में आज वट पूजा बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। गांव की सैकड़ों महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं पति की दीर्घायु की कामना की। सुबह से ही गांव में धार्मिक माहौल देखने को मिला, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर बरगद के पेड़ के पास पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
पूजा के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। ग्रामीणों ने बताया कि यह पूजा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। गांव में भक्ति गीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
क्या है वट पूजा की हक़ीक़त?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री पूजा की शुरुआत पौराणिक काल से मानी जाती है। कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों और पुराणों में भी इस व्रत का उल्लेख मिलता है।
धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इसी कारण बरगद के पेड़ की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य भारत के कई हिस्सों में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि यह पूजा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक भी है। टाटीदीरी ग्राम पंचायत में भी महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा कर गांव की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
इस दौरान गांव के बुजुर्गों और युवाओं की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली। पूरे आयोजन में शांति एवं उत्साह का माहौल बना रहा।
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