टाटीदीरी की बदहाल सड़कें बनीं ग्रामीणों की मुसीबत, मरीजों से लेकर स्कूली बच्चों तक की बढ़ी परेशानी।
गढ़वा | धुरकी | टाटीदीरी
गढ़वा जिले के धुरकी थाना क्षेत्र अंतर्गत टाटीदीरी ग्राम पंचायत से सड़क की बदहाल स्थिति की तस्वीरें सामने आई हैं। पंचायत के विभिन्न गांवों को जोड़ने वाली सड़कों की हालत खराब होने से ग्रामीणों को रोजाना आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इन्हीं रास्तों से होकर बच्चे स्कूल जाते हैं, ग्रामीण अपने जरूरी कामों के लिए बाजार और प्रखंड मुख्यालय पहुंचते हैं और बीमार लोगों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। ऐसे में खराब सड़कें ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही हैं।
मरीजों और आपात स्थिति को लेकर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आपात स्थिति में आवागमन मुश्किल हो जाता है। एंबुलेंस या अन्य वाहन को गांव तक पहुंचने में परेशानी होने की बात भी सामने आती रही है।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी परिवार में अचानक कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, तो उसे समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
हालांकि, किसी व्यक्ति की मृत्यु सीधे सड़क की खराब स्थिति के कारण हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
स्कूल जाने वाले बच्चों की भी परेशानी
टाटीदीरी की खराब सड़कों का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और खराब होने पर बच्चों को कीचड़, गड्ढों और जलजमाव के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।
सवाल यह है कि जिस रास्ते से भविष्य की पीढ़ी स्कूल पहुंचती है, उस रास्ते की स्थिति कब सुधरेगी?
अधिकारी और जनप्रतिनिधियों से सवाल
ग्रामीण क्षेत्र के विकास में सड़कें सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं में से एक हैं। सड़क खराब होने का असर सिर्फ आवागमन पर नहीं पड़ता, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच पर भी पड़ता है।
टाटीदीरी की सड़कें अब जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों से कई सवाल पूछ रही हैं—
क्या संबंधित विभाग सड़क की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण करेगा?
क्या खराब सड़कों की मरम्मत के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई है?
ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा कब मिलेगी?
और सबसे बड़ा सवाल—
आखिर टाटीदीरी की बदहाल सड़कों का स्थायी समाधान कब होगा?
न्याय की बात की यह ग्राउंड रिपोर्ट ग्रामीणों की समस्या को सामने लाने का प्रयास है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस समस्या पर क्या कदम उठाते हैं।
रिपोर्ट: न्याय की बात | गढ़वा, झारखंड













