उत्तर प्रदेश: आज हम आपको लेकर चल रहे हैं उत्तर प्रदेश के सोनभद्र की उस पवित्र और रहस्यमयी धरती पर, जहाँ आज भी गूंजती है वीरता की एक अमर गाथा — वीर लोरिक की कहानी।
सोनभद्र के घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा है लोरिक पहाड़, जो सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि प्रेम, संघर्ष और वीरता की पहचान है।
कहा जाता है कि वीर लोरिक, एक साहसी और न्यायप्रिय योद्धा थे, जो अपने समय में गरीबों और कमजोरों के रक्षक माने जाते थे।
लोरिक की कहानी जुड़ी है चंदा नाम की एक सुंदर राजकुमारी से, जो अपने अत्याचारी पति से दुखी थी।
जब लोरिक की मुलाकात चंदा से हुई, तो उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और चंदा को उसके बंधनों से मुक्त कराने का प्रण लिया।
कहते हैं कि लोरिक ने चंदा के पति और उसके सैनिकों से भयंकर युद्ध किया।
यह युद्ध सोनभद्र के इसी पहाड़ पर हुआ, जहाँ आज भी लोगों का मानना है कि उस लड़ाई के निशान पत्थरों पर मौजूद हैं।
अपनी बहादुरी और ताकत से लोरिक ने हर दुश्मन को हराया और सच्चे प्रेम व न्याय की जीत दिलाई।
आज भी स्थानीय लोग इस पहाड़ को वीर लोरिक की कर्मभूमि मानते हैं।
यहाँ हर साल लोग आते हैं, पूजा करते हैं और इस गाथा को गर्व से सुनाते हैं।
तो ये थी सोनभद्र के वीर लोरिक की अमर कहानी, जो हमें सिखाती है कि सच्चाई और साहस के सामने हर अन्याय हार जाता है।
अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और हमारे चैनल Nyay Ki Baat को सब्सक्राइब करना न भूलें।
Nyaykibaat.com












