अंग्रेजों के समय से आज तक पुल का इंतज़ार! गढ़वा के टंडवा गांव के ग्रामीण आज भी बांस की पगडंडी के सहारे आने-जाने को मजबूर।
झारखंड के गढ़वा जिले के रमना प्रखंड अंतर्गत टंडवा गांव के ग्रामीण वर्षों से एक पुल और सुगम आवागमन की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अंग्रेजों के शासनकाल से लेकर आज तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका।
बारिश का मौसम आते ही गांव की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। जलभराव के कारण गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग कट जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार आवश्यक कार्य होने के बावजूद लोग घरों में ही रहने को विवश हो जाते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों ने पुल निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद यह वादा पूरा नहीं हुआ। अब हालात ऐसे हैं कि गांव के लोगों ने अपने श्रम से बांस की एक अस्थायी पगडंडी तैयार कर ली है और उसी के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक पुल का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ा जनहित का प्रश्न है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण नहीं हुआ तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
अब ग्रामीणों ने अपनी आवाज़ प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुँचाने के लिए मीडिया का सहारा लिया है। लोगों की उम्मीद है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा और वर्षों से लंबित पुल निर्माण का कार्य जल्द शुरू होगा।
हालांकि, इस संबंध में प्रशासन या संबंधित जनप्रतिनिधि का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या टंडवा गांव के लोगों का दशकों पुराना इंतज़ार खत्म होगा और पुल बनेगा, या फिर ग्रामीणों को आगे भी बांस की पगडंडी के सहारे ही जीवन बिताना पड़ेगा।
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