भदोही: संदिग्ध परिस्थितियों में युवक का शव मिलने से हड़कंप, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप।
भदोही। ऊंज थाना क्षेत्र के सूफी नगर में एक 37 वर्षीय युवक का शव पेड़ के सहारे मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान राजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। इस घटना के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में मातम का माहौल बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि यह घटना 8 अप्रैल 2026 की रात की है। उस समय घर के सदस्य किसी रिश्तेदारी में गए हुए थे। देर रात जब मृतक का छोटा भाई घर पहुंचा तो राजेश विश्वकर्मा कहीं नजर नहीं आए। खोजबीन करने पर घर के पीछे पेड़ के पास उनका शव संदिग्ध अवस्था में मिला।
परिजनों के अनुसार, शव को रस्सी से नीचे उतारकर तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है। परिजनों का कहना है कि
(1) रामा शंकर, (2)जोगिंदर, (3)मनोज, (4)गया और (5) मिठाई लाल यादव
ने मिलकर राजेश विश्वकर्मा की हत्या की और बाद में शव को पेड़ के सहारे लटका दिया।
परिवार का आरोप है कि घटना की सूचना डायल 112 पर काफी देर से दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और बिना विधिवत पंचनामा किए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
परिजनों का कहना है कि उन्हें थाने बुलाया गया, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही पोस्टमार्टम के लिए शव भेज दिया गया था। बाद में उनसे पंचनामा पर हस्ताक्षर कराए गए।
सबसे बड़ा आरोप यह है कि अब तक थाने में FIR दर्ज नहीं की गई है, जिससे परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इस मामले को लेकर लोक जन सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र विश्वकर्मा 12 अप्रैल 2026 को मौके पर पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी से बातचीत कर तुरंत FIR दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
घटना के बाद पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
परिजन और ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि मृतक को न्याय मिल सके।
भदोही के सूफी नगर में हुई यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या यह आत्महत्या है या हत्या? पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
न्याय की बात।
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