गढ़वा: चामा गांव में तीन साल से टूटी पुलिया, हादसे का खतरा बरकरार; न्याय की बात ने प्रशासन का ध्यान कराया आकृष्ट।
गढ़वा, झारखंड। गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड अंतर्गत चामा गांव के उत्तरी टोला में छठ घाट के पास स्थित टूटी पुलिया ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुलिया करीब तीन साल से टूटी हुई है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। पुलिया की जर्जर स्थिति के कारण यहां से आने-जाने वाले लोगों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का आरोप—वादे हुए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया की मरम्मत को लेकर जनप्रतिनिधियों से कई बार उम्मीद जताई गई। लोगों का कहना है कि नेता से लेकर मुखिया तक इस समस्या के समाधान का भरोसा दे चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है।
टूटी पुलिया की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। खासकर पैदल आने-जाने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता जोखिम भरा हो सकता है।
मौके पर पहुंची न्याय की बात की टीम
ग्रामीणों की समस्या की जानकारी मिलने पर न्याय की बात की टीम मौके पर पहुंची और पुलिया की स्थिति का जायजा लिया। टीम ने संबंधित बीडीओ-सह-अंचल अधिकारी सुवंत नायक से फोन पर संपर्क कर मामले को संज्ञान में लेने तथा आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन इस समस्या पर क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को कब तक राहत मिल पाती है।
प्रशासन और संबंधित विभाग से ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि पुलिया की स्थिति की तकनीकी जांच कराई जाए और मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएं। साथ ही, जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं।
स्थानीय लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान करना प्रशासन और संबंधित विभागों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि किसी सार्वजनिक रास्ते या पुलिया की स्थिति खतरनाक है, तो उस पर समय रहते ध्यान देना आवश्यक है।
बड़ा सवाल: तीन साल से टूटी पुलिया की मरम्मत कब होगी?
चामा गांव के उत्तरी टोला में छठ घाट के पास स्थित पुलिया को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसकी मरम्मत कब कराई जाएगी। क्या संबंधित विभाग ग्रामीणों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करेगा?
न्याय की बात इस मुद्दे को जनता की आवाज के रूप में सामने ला रहा है। अब ग्रामीणों को प्रशासन की पहल और समस्या के स्थायी समाधान का इंतजार है।
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