गेरुआ गांव में 12 से 14 घर ध्वस्त, पीड़ितों का सवाल—कागजात और सरकारी आवास के बावजूद क्यों उजड़े आशियाना।
गढ़वा | मेराल। गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड अंतर्गत गेरुआ ग्राम पंचायत में 12 से 14 घरों को ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गई, जिसके दौरान पुलिस प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद थी। लेकिन इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने अपनी जमीन, कागजात और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
70 से 80 वर्षों से रहने का दावा
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे पिछले 70 से 80 वर्षों से इस स्थान पर रह रहे हैं। उनके अनुसार, जमीन से संबंधित कागजात उनके नाम पर हैं और जमीन की ऑनलाइन रसीद भी कट रही है। परिवारों का यह भी दावा है कि उन्हें सरकार की ओर से आवास योजना का लाभ मिला था।
अब प्रभावित परिवार सवाल उठा रहे हैं कि यदि उनके पास जमीन से संबंधित दस्तावेज और सरकारी आवास योजना का लाभ मौजूद था, तो उनकी जमीन को अवैध किस आधार पर माना गया? हालांकि, इन दावों की पुष्टि संबंधित राजस्व अभिलेखों और सरकारी दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकती है।
न्यायालय में मामला लंबित होने का आरोप
पीड़ित परिवारों का दावा है कि जमीन से जुड़ा मामला जिला न्यायालय में चल रहा था। उनका आरोप है कि SIR प्रक्रिया का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की गई, जबकि मामले से संबंधित कानूनी प्रक्रिया अभी जारी थी।
इस संबंध में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ध्वस्तीकरण किस न्यायालय के आदेश पर किया गया, आदेश में क्या निर्देश दिए गए थे और क्या कार्रवाई के समय कोई स्थगन आदेश या अन्य न्यायिक रोक लागू थी? इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना आवश्यक है।
पीड़ितों की मांग—निष्पक्ष जांच हो
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। वे सरकार और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
परिवारों का कहना है कि यदि जांच में वे दोषी पाए जाते हैं, तो वे कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करने को तैयार हैं। लेकिन यदि कार्रवाई में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब प्रशासन से जवाब का इंतजार
गेरुआ गांव का यह मामला जमीन के दस्तावेजों, सरकारी योजनाओं और न्यायिक आदेशों के बीच तालमेल को लेकर कई सवाल खड़े करता है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके दस्तावेजों की जांच की जाए, न्यायालय के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई का आधार स्पष्ट किया जाए तथा सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए।
न्याय की बात के सवाल:
– ध्वस्तीकरण किस न्यायालय के आदेश पर किया गया?
– क्या कार्रवाई के समय मामला लंबित था और क्या कोई स्थगन आदेश लागू था?
– जमीन की ऑनलाइन रसीद और सरकारी आवास योजना से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई थी या नहीं?
– क्या प्रशासन पीड़ित परिवारों के दावों की निष्पक्ष जांच कराएगा?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब संबंधित न्यायिक आदेशों, राजस्व अभिलेखों और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष से ही सामने आ सकेगा।
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