अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत के प्रधान ने कर दिखाया, ग्राम प्रधान क्या होता है – अच्छे कार्यों से बने मिसाल, दूसरे प्रधानों को खुली चुनौती।
भदोही जनपद के अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायत व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यह खबर है उस ग्राम प्रधान की, जिसने अपने कार्यों से यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो, सोच सकारात्मक हो और जनता के हित में काम करने का जज़्बा हो, तो ग्राम प्रधान भी विकास की नई इबारत लिख सकता है।
अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान ने अपने कार्यकाल में जो विकास कार्य किए हैं, वे आज जिले के अन्य ग्राम पंचायतों के लिए एक उदाहरण बन चुके हैं। सड़क, नाली, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक समरसता—हर क्षेत्र में किए गए कार्यों ने यह साबित कर दिया कि ग्राम पंचायत केवल कागजों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी विकास कर सकती है।
ग्राम प्रधान के कार्यों की सराहना केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार तक ने उनके प्रयासों को स्वीकार किया है। जानकारी के अनुसार, अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत के प्रधान को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई बार जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री स्तर से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि प्रधान द्वारा किए गए विकास कार्य सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक और प्रभावी रहे हैं।
जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस ग्राम पंचायत में योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ किया गया। मनरेगा हो या प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन हो या जल जीवन मिशन—हर योजना का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाया गया।
कुछ वर्ष पहले तक अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत भी आम ग्रामीण इलाकों की तरह मूलभूत सुविधाओं से जूझ रही थी। कच्ची सड़कें, जलभराव की समस्या, साफ-सफाई की कमी और सरकारी योजनाओं का अधूरा क्रियान्वयन—यह सब गांव की पहचान बन चुका था। लेकिन ग्राम प्रधान के नेतृत्व में हालात पूरी तरह बदल गए।
आज गांव में पक्की सड़कें हैं, नालियों की समुचित व्यवस्था है, हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की दिशा में काम हुआ है। विद्यालयों में साफ-सफाई, शौचालय और बैठने की व्यवस्था में सुधार किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया गया है, जिससे ग्रामीणों को छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए दूर भटकना न पड़े।
गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें पहली बार ऐसा प्रधान मिला है, जो सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर समय जनता के बीच रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि किसी भी समस्या को लेकर जब वे प्रधान के पास जाते हैं, तो उन्हें टालने की बजाय समाधान की कोशिश की जाती है।
एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, “हमने कई प्रधान देखे, लेकिन ऐसा प्रधान पहली बार देखा, जो काम बोलता है, भाषण नहीं।” वहीं महिलाओं का कहना है कि गांव में स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर पहले कभी इतनी गंभीरता नहीं दिखाई गई थी।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस बयान की हो रही है, जिसमें ग्राम प्रधान ने खुले मंच से अन्य ग्राम प्रधानों को चुनौती दे दी। प्रधान ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि उनके द्वारा कराया गया कोई भी कार्य गलत, घटिया या नियमों के विपरीत है, तो वह उसी स्थान पर बैठकर उसकी दस गुना भरपाई करने को तैयार हैं।
प्रधान का यह बयान न केवल आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि उनके कार्यों की गुणवत्ता पर भी मुहर लगाता है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और वे हर जांच के लिए तैयार है।
प्रधान के इस बयान के बाद जिले की पंचायत राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कुछ प्रधानों ने जहां इसे “दिखावा” बताया, वहीं कई प्रधानों ने इसे एक सकारात्मक पहल करार दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले पंचायत चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
विपक्षी विचारधारा से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि किसी भी प्रधान को इस तरह की चुनौती नहीं देनी चाहिए, जबकि समर्थकों का कहना है कि अगर काम ईमानदारी से हुआ है, तो चुनौती देने में कोई बुराई नहीं है।
प्रधान के इस खुले बयान के बाद जिला प्रशासन की भी नजरें अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत पर टिक गई हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ योजनाओं की फाइलों और कार्यों की जांच की जा सकती है, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि कार्य मानकों के अनुसार हैं, तो जांच से डरने की जरूरत नहीं है।
अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत का यह मामला पूरे जिले की ग्राम पंचायतों के लिए एक संदेश है। यह दिखाता है कि ग्राम प्रधान अगर ईमानदारी से काम करे, तो न केवल गांव की तस्वीर बदल सकता है, बल्कि शासन और प्रशासन का भरोसा भी जीत सकता है।
यह घटना उन प्रधानों के लिए भी एक चेतावनी है, जो विकास के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाते हैं। जनता अब जागरूक है और काम करने वाले और काम न करने वाले प्रधानों में फर्क समझने लगी है।
भदोही जिले की अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत की यह घटना केवल एक प्रधान की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाती है। ग्राम प्रधान का यह दावा और चुनौती आने वाले समय में पंचायत व्यवस्था की दिशा और दशा तय कर सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस चुनौती के बाद अन्य ग्राम प्रधान क्या रुख अपनाते हैं और प्रशासन इस पूरे मामले को किस तरह देखता है। लेकिन इतना तय है कि अभिया पुरेमनोहर ग्राम पंचायत ने यह साबित कर दिया है कि ग्राम प्रधान चाहे तो इतिहास रच सकता है।
#https://youtube.com/@nyaykibaat1?si=-p3UGZWnT4dQDg5t
न्याय की बात।
Nyaykibaat.com













