रंग लाया जज सिंह अन्ना का 4 दिवसीय तप; डीएम के आश्वासन व भाजपा जिलाध्यक्ष के आग्रह पर समाप्त हुआ अनशन
जल्द होगी विभागों की संयुक्त बैठक, तय होगी सड़कों की जिम्मेदारी।
जौनपुर: जिले में सड़कों की दुर्दशा और नागरिकों को हो रही परेशानियों को लेकर जज सिंह अन्ना ने निर्भीक सत्याग्रह की मिसाल पेश की। कड़ाके की गर्मी और अनदेखी के बावजूद अन्ना ने चार दिनों तक अनशन किया, जिससे प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का ध्यान समस्या की ओर दृढ़ता से केंद्रित हुआ। उनका यह 4 दिवसीय तप अंततः रंग लाया, जब जिलाधिकारी, जनहित को सर्वोपरि रखते हुए आश्वासन दिया और भाजपा जिलाध्यक्ष के आग्रह के बाद अनशन समाप्त हुआ।
अनशन स्थल पर मौजूद स्थानीय नागरिकों ने बताया कि जज सिंह अन्ना का संघर्ष सड़कों पर लगातार बदलते मौसम और नगरीय यातायात में बढ़ती कठिनाइयों के बीच शुरू हुआ था। कई महीनों से न तो सड़कों की मरम्मत हुई थी और न ही संबंधित विभागों ने किसी गंभीरता से समस्या लेकर कदम उठाए थे। लोगों का कहना था कि भारी वर्षा के बाद सड़कें खस्ताहाल हो चुकी थीं, गड्ढों ने मानो जनजीवन को बुरे हालात में डाल दिया था, जिससे रोजाना आवागमन कठिन हो गया था।
जज सिंह अन्ना ने बताया कि “जब तक हमारी आवाज़ प्रशासन तक नहीं पहुँची, तब तक कई बार हमने अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं देखने को मिली। इसलिए मैंने यह सत्याग्रह शुरू किया और आज प्रशासन ने हमारी मांगों को गंभीरता से लिया है।
जिलाधिकारी जौनपुर ने अनशन स्थल पर पहुंचकर नागरिकों की समस्याएँ सुनीं और सड़कों की मरम्मत तथा सुधार के लिए एक संयुक्त विभागीय बैठक जल्द बुलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में नगर निगम, राजमार्ग विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा अन्य संबद्ध एजेंसियाँ शामिल होंगी और सड़क निर्माण/मरम्मत के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा, “हम सभी संबंधित विभागों को साथ लेकर एक ठोस रोडमैप बनाएँगे, ताकि जो भी सड़कों की समस्याएँ हैं, उन्हें प्राथमिकता के क्रम में सुधारा जाए। किसी भी विभागीय उदासीनता को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी इस मौके पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि “जनहित की लड़ाई में राजनीतिक हित पीछे रह जाता है। आज जज सिंह अन्ना ने जो साहस दिखाया है, वह सभी नागरिकों के लिए प्रेरणास्पद है। प्रशासन ने उचित प्रतिक्रिया दी है और हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही परिणाम दिखाई देंगे।
स्थानीय व्यापारियों, छात्रों और राहगीरों ने जज सिंह अन्ना के इस संघर्ष को सराहा और कहा कि “सड़कों की खराब स्थिति के कारण रोजाना छोटे-बड़े हादसे होते थे। गड्ढों में फँसी गाड़ियाँ, स्कूटी वाले बाल-बाल बचते थे और पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था। अब आशा है कि प्रशासन द्वारा बैठक के बाद सुधर होगा।
अनशन समाप्त होने के बाद जज सिंह अन्ना ने लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि “नागरिकों का सहयोग और प्रशासन का सकारात्मक रूख ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अब हमारी निगाहें उस संयुक्त बैठक पर हैं, जिसमें वास्तविक कार्ययोजना बने और जल्द कार्य शुरू हो।
इस तरह चार दिनों का सत्याग्रह न केवल प्रशासन की प्रतिक्रिया को आकर्षित करने में सफल रहा, बल्कि यह एक संदेश भी बन गया कि यदि जनता संगठित होकर और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्या रखे, तो प्रशासन भी जवाबदेह होकर समाधान की ओर कदम बढ़ाता है।
न्याय की बात।
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