झूठे आरोपों में जेल, लेकिन सच अडिग: मीडिया के सामने भावुक हुए अरविंद केजरीवाल।
नई दिल्ली।
राजनीति में झूठ और साज़िश कितनी भी गहरी क्यों न हों, सच को दबाया नहीं जा सकता। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जिन आरोपों के आधार पर जेल भेजा गया, आज वही आरोप सवालों के घेरे में हैं। जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल पहली बार मीडिया के सामने आए और अपनी स्थिति को भावुक होकर देश की जनता के सामने रखने की कोशिश की।
मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल की आँखों में आँसू थे और आवाज़ में दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि उन्हें झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर जेल भेजा गया, लेकिन पूरी कार्रवाई के दौरान उनके खिलाफ कोई ठोस और निर्णायक सबूत सामने नहीं आया।
केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी और सच्चाई के साथ जनता की सेवा की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक साज़िश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य उन्हें और उनकी पार्टी को बदनाम करना था। मीडिया के सामने बोलते हुए वे कई बार भावुक हो गए और कहा कि जेल की कठिन परिस्थितियों में भी उनका विश्वास सच्चाई से नहीं डगमगाया।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना अपराध नहीं हो सकता। यदि सच्चाई के रास्ते पर चलने की यही सज़ा है, तो वे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
केजरीवाल ने देश की जनता से अपील करते हुए कहा कि सच्चाई को परेशान किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि न्याय व्यवस्था पर उन्हें पूरा विश्वास है और अंततः सच की जीत होगी।
फिलहाल, केजरीवाल के इस भावुक बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। समर्थक इसे अन्याय बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इसे राजनीतिक बयानबाज़ी करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी हलचल और तेज़ होने की संभावना है।
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