बरसठी थाना क्षेत्र के सिरौली गांव में विकास के दावों की खुली पोल।
जौनपुर जिला को अक्सर शिक्षा और विकास के मामले में प्रदेश में अग्रणी बताया जाता है। प्रशासनिक मंचों से लेकर सरकारी रिपोर्टों तक यह दावा किया जाता है कि जौनपुर अन्य जिलों की तुलना में अधिक शिक्षित और विकास के मामले में नंबर एक है।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।
बरसठी थाना अंतर्गत सिरौली गांव में ग्रामीणों ने खुलकर अपने दर्द और समस्याएं सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आज तक ऐसा कोई ठोस विकास कार्य देखने को नहीं मिला, जिसे प्रशासनिक उपलब्धि कहा जा सके।
ग्रामीणों के अनुसार,
गांव की कई सड़कें आज भी कच्ची या जर्जर हालत में हैं।
नालियों की समुचित व्यवस्था न होने से बरसात के मौसम में जलभराव आम समस्या है।
स्वच्छ पेयजल, स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ भी अधिकांश लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी निरीक्षण के दौरान विकास कार्यों का दावा तो करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे, लेकिन विकास के नाम पर गांव आज भी पीछे छूटता जा रहा है।
स्थानीय युवाओं ने भी सवाल उठाया कि अगर जौनपुर जिला वास्तव में शिक्षा और विकास में नंबर एक है, तो सिरौली जैसे गांवों की हालत इतनी बदहाल क्यों है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन केवल आंकड़ों और दावों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों में वास्तविक विकास कार्य कराए।
अब देखना यह है कि ग्रामीणों द्वारा उठाई गई इन समस्याओं पर जिला प्रशासन कब संज्ञान लेता है और सिरौली गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, या फिर यह गांव भी सिर्फ फाइलों में ही विकसित माना जाता रहेगा।
न्याय की बात।
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